Napunsakta Ko Door Karne Ke Liye Desi Upay

Napunsakta Ko Door Karne Ke Liye Desi Upay

नपुंसकता को दूर करने के लिए देसी उपाय-

नपुंसकता किसे कहते हैं?

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नपुंसकता, नामर्दी उस बला व समस्या को कहते हैं, जिसमें पुरूष, ‘स्त्री-प्रसंग’ के लायक नहीं रहता है। यानी जब कोई पुरूष संभोग के समय स्त्री को बिना संतुष्ट किये ही कुछ ही क्षणों में(यौन प्रवेश से पूर्व या यौन प्रवेश के तुरन्त बाद) स्खलित हो जाये तो यह नामर्दी व नपुंसकता की निशानी है। ऐसे मर्द व पुरूष को नपुंसक की श्रेणी में रखा जा सकता है। बशर्ते यदि हर बार संभोग के समय ऐसा होता हो तो। कभी-कभार हो तो यह कोई रोग व समस्या नहीं मानी जायेगी।
नपुंसकता की दो अवस्थायें होती हैं, एक तो मानसिक दूसरी शारीरिक। कई बार पुरूष नपुंसक नहीं होता, बल्कि कई बार हालात ही ऐसे हो जाते हैं कि संभोग के समय लिंग में तनाव ही नहीं आ पाता और अगर आता भी है, तो वह तुरन्त शीतल भी हो जाता है। और फिर जब ऐसा एक या दो बार होता है, तो पुरूष स्वयं ही ऐसी धारणा बना लेता है कि वह नपुंसक रोगी हो चुका है। वह स्त्री के लायक नहीं रहा। इसी स्थिति को मानसिक नपुंसकता कहते हैं।
किन्तु शारीरिक नपुंसकता में पुरूष के अंदर लिंग दोष या फिर कोई अन्य विकार होते हैं, जिनसे वह नामर्दी का शिकार हो जाता है।

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नपुंसकता को दूर करने के लिए देसी उपाय-

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1. बिदारीकन्द 10 ग्राम को सिल पर पीसकर लुगदी बना लें। इसे मुंह में रखकर ऊपर से घी 10 ग्राम और मिश्री 20 ग्राम मिलाक दूध पीने से खूब वीर्य बढ़ता है। एक-दो साल के निरन्तर सेवन करने से बूढ़ा भी जवान के समान हो सकता है।

2. सोना मक्खी की भस्म, शुद्ध पारे की भस्म, लौह भस्म, शिलाजीत, बायबिडंग, हरड़, घी तथा शहद। सबको उचित मात्रा में प्रयोग करने वाला व्यक्ति एकदम कड़ियल सख्त मर्द बन जाता है।

3. जो व्यक्ति असगन्ध चूर्ण में मिश्री, घी और शहद मिलाकर चार तोला प्रतिदिन खाते हैं, वे चार माह में जवान हो जाते हैं। बड़ा ही अच्छा योग है। लेकिन याद रखें कि शहद व घी की मात्रा रोगी के अनुसार ही सही-सही रखनी चाहिए, अन्यथा वह योग विष तुल्य हो जाता है।

4. दूध 20 किलो में कौंच के बीजों की गिरी 4 कि.ग्रा. बारीक कूटकर पका लें। मावा बन जाने पर इसको कड़ाही में आधा किलो देशी घी के साथ अच्छी तरह भूनकर लाल कर लें। तत्पश्चात् कड़ाही को नीचे उतार कर रख लें। फिर आठ किलो चीनी की चाशनी बनाकर यह खोवा भली-भांति मिलाकर हिलायें एवं इसी गर्म-गर्म चाशनी में निम्नलिखित औषधियों का चूर्ण भी मिला लें।
पीपल छोटी, जायफल, गजपीपल, लौंग, तेजपात, समुन्द्रसोख, जावित्री, सफेद जीरा, अजवायन, नागकेसर, दालचीनी, छोटी इलायची, अकरकरा, काली मिर्च, सोंठ प्रत्येक 50 ग्राम।
उपरोक्त सभी औषधियों को कूट-छानकर उपरोक्त चाशनी में मिलाने के पश्चात् इसके 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। सर्दियों में इसका प्रयोग अच्छा रहता है। एक लड्डू सवेरे खाकर ऊपर से दूध पी लेना चाहिए। इसके प्रयोग से दुर्बलता दूर होकर बल व वीर्य में वृद्धि होती है। इसके सेवन से बूढ़े व्यक्तियों में व्याप्त नामर्दी दूर होकर कामशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है।

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5. पीपल वृक्ष के छाल, अंकुर, फल व जड़ प्रत्येक 5 ग्राम लें। पाव भर दूध में एक किलो पानी मिलाकर इन्हें डालकर खूब उबालें। आधा किलो पानी रह जाने पर मिश्री मिलाकर पी लें। 6 मास तक इसका सेवन करने से बूढ़ा भी जवान हो जाता है।

6. इमली के भुने बीज, असगन्ध नागौरी या सिरस के बीज में से कोई एक वस्तू लेकर बारीक चूर्ण बना लें। प्रतिदिन सुबह-शाम यह चूर्ण 3-3 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ एक माह तक सेवन करते रहने से शरीर में नव-यौवन का संचार होकर नामर्दी का नाश होने लगता है।

7. त्रिवंगभस्म चार रत्ती को मलाई में मिलाकर खाने से बुढ़ापे की नपुंसकता दूर होती है। जवान पुरूष भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

8. शुद्ध कुचला एक रत्ती को मलाई में रखकर खाने से बुढ़ापे में भी नपुंसकता नहीं आती है।

9. कुकुटाष्तक भस्म चार रत्ती, रस सिन्दूर एक रत्ती मलाई में खाने से हर प्रकार की नपुंसकता दूर हो जाती है।

10. मधु के साथ पुत्वधन्वा रस दो-दो गोली दिन में तीन बार लेने से किसी भी उम्र में नपुंसकता पास नहीं फटकती और संभोग का आनंद लिया जा सकता है।

11. शहद में मुलेठी चूर्ण एवं सेमल की जड़ का चूर्ण प्रत्येक 3 ग्राम मिलाकर चाटने से नामर्दी दूर होती है।

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12. नपुंसकता, सहवास न कर पाने में असमर्थता, बुढ़ापे में पौरूषशक्ति हीनता, रतिक्रिया के समय लिंग में उत्तेजना का न आना, अत्यधिक वीर्यनाश कर लेने के कारण रति न कर सकना, यौन समागम का आनंदहीन होना, वीर्य पर्याप्त मात्रा में उत्पन्न न होना, सहवास के समय लिंग का शिथिल हो जाना, भोजन न पचना, भूख का न होना, मुखमंडल का निस्तेज होना इत्यादि विकार निम्नलिखित ‘चन्द्रोदय रस’ योग से दूर हो जाते हैं।
लौंग, सिद्ध मकरध्वज, काली मिर्च, जायफल, काफूर प्रत्येक 10 ग्राम, कस्तूरी 1 ग्राम। सर्वप्रथम मकरध्वज को इतना सूक्ष्म पीस लें कि उसकी चमक बिल्कुल समाप्त हो जाये। तत्पश्चात् काफूर मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर इतना रगड़ें कि पीसकर मलाई-सी बन जाये। अब कस्तूरी मिलाकर और रगड़ कर कपड़छान की हुई औषधियां मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर 24 घंटे तक जोर से खरल करें। तत्पश्चात् 2-2 रत्ती की गोलियां बनाकर उन पर चाँदी या सोने के वर्क चढ़ा कर रख लें। एक-एक गोली सुबह-शाम गर्म दूध के साथ लें। इसके साथ 3 ग्राम अश्वगन्धा चूर्ण खाने से यह योग इंजेक्शनों से भी अधिक लाभदायक सिद्ध होता है या इस योग की एक-एक गोली या दो रत्ती पाउडर शहद तथा पान का रस मिलाकर खिलायें तथा ऊपर से गर्म दूध पिलायें।

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