Napunsakta Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

Napunsakta Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

नपुंसकता दूर करने के देसी आयुर्वेदिक उपाय

नामर्दी, नपुंसकता

Napunsakta Ka Ilaj, Namardi Ka Ilaj, Treatment of Impotency, Erectile Dysfunction

आज पूरे विश्व में लगभग 90 प्रतिशत पुरूष नपुंसकता की समस्या से जूझ रहे हैं। इसकी वजह है- सामाजिक गतिशीलता, नशीली औषधियों का व्यापक प्रयोग, गंदी फिल्मों का प्रसार आदि। संसार के अधिकांश व्यक्ति शारीरिक नपुंसकता की बजाए मानसिक नपुंसकता के शिकार होते हैं। मानसिक नपुंसक व्यक्ति शारीरिक दृष्टिकोण से हृष्ट-पुष्ट और बलिष्ठ होते हैं, लेकिन स्त्री के समक्ष भीगी बिल्ली बन जाते हैं। यह कोई रोग नहीं है, बल्कि शरीर से उठा हुए एक लक्षण मात्र है, जो ठीक हो सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

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नपुंसकता की परिभाषा-

जब कोई पुरूष पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से स्त्री के साथ संभोग करने में असमर्थ हो जाता है, तब इसको नपुंसकता नाम से संबोधित किया जाता है। संभोग सामथ्र्य का अभाव हो जाना ही नपुंसकता है। नपुंसकता शब्द पुरूष के लिए है, स्त्री के लिए नहीं।
नपुंसकता का सीधा अर्थ पुरूष के शिश्न की उत्थान शक्ति से संबंधित है। जब पुरूष के शिश्न की उत्थान शक्ति घट जाती है अथवा क्षीण हो जाती है, तब नपुंसकता उत्पन्न होती है। शिश्न जब तक भली-भांति उत्तेजित नहीं होगा, तब तक संतोषप्रद संभोग क्रिया सम्पन्न नहीं होती है। आंशिक रूप से यदि उत्तेजना हो भी गई, तब भी पीड़ित रोगी को तथा उसकी सहयोगी स्त्री को उतना आनंद प्राप्त नहीं होता, जितना पूर्ण उत्तेजित शिश्न से प्राप्त होता है। नपुंसकता को ही क्लीवता, ध्वज भंग, शिश्न की उत्थान शक्ति का असमय पतन हो जाना, ढीला-ढाला पड़ जाना, शिश्न शिथिल पड़ जाना, संभोग असमर्थता, नामर्दी, इम्पोटेन्सी आदि नामों से पुकारा जाता है।

नामर्दी, नपुंसकता दूर करने की आयुर्वेदिक विधियाँ-

Napunsakta Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

1. अकरकरा 25 ग्राम, ऊंटकटा की जड़ की छाल 25 ग्राम, असगंध नागौरी 100 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियां एकत्र करें। तीनो औषधियों को अच्छे से कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। 8-10 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार दूध से अथवा आवश्कतानुसार सेवन करने का पीड़ित को निर्देश दें। यह पूर्ण नपुंसकता का नाश करके रोगी को पूर्ण शक्तिशाली और सक्षम बना देता है। कुछ ही दिन के प्रयोग से पीड़ित रोगी बलवीर्य तथा कांतिवान हो जाता है। यह अद्वितीय शक्तिप्रद चूर्ण है। यह तीव्र गति से असर करता है। यह मांसपेशियों को ताकत प्रदान करता है। इसका सेवन निष्फल नहीं होता।

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2. हिंगुल से निकला पारा, शुद्ध अफीम और सफेद संखिया प्रत्येक 12-12 ग्राम लें।
विधि- उपर्युक्त तीनों औषधियों को एकत्र करें। इन तीनों को अलग-अलग कई घण्टे तक खरल करें। उसके पश्चात् एक साथ मिलाकर खरल करें। इसको जितना अधिक खरल किया जायेगा उतना ही श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है। पारे की चमक खत्म होने तक खरल करते रहना कत्र्तव्य है। खरल हो जाने से यह सुरमे की तरह बारीक हो जाये, तब इसको सेवन के योग्य समझना चाहिए। इसकी मात्रा 5 मि.ग्रा. भर होती है। यह मात्रा रात को सोते समय अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। 5 मि.ग्रा. भर मात्रा मक्खन या मलाई में लपेट कर सेवन कराना हितकर होता है। च्यवनप्राश में लपेट कर भी सेवन करने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके सेवन से जबरदस्त मर्दाना शक्ति उत्पन्न होती है। रोगी यौन तृप्ति अनुभव करने लगता है। यह रामबाण अचूक योग है। इसलिए निष्फल नहीं जाता।

3. अफीम 3 ग्राम, अजवाइन 5 ग्राम, केसर 500 मि.ग्रा., कद्दू बीज 5 ग्राम, इलायची 1 ग्राम, भुने चने 7 ग्राम, पोस्ट डोडा 2 नग, इसबंद 9 ग्राम, भाँग 8 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियां एकत्र करें। समस्त औषधियों को कूट-पीसकर एक जान चूर्ण कर लें। उसके पश्चात् छान लें। छन जाने के बाद पोस्त के डोडों को पानी में भिगोकर अच्छी तरह मसल कर उसका रस निकाल लें। उपरोक्त औषधियोें के चूर्ण को पोस्त के पानी में खरल करें और बेर के बराबर गोलियों का निर्माण कर लें। एक गोली दिन में 1-2 बार दूध के साथ अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ अर्जित हो जाता है। यह योग परीक्षित है। इस योग की प्रभावशक्ति अति प्रबल होती है। यह तीव्र गति से नपुंसकता का नाश करके रोगी के शरीर में बलवीर्य एवं कांति उत्पन्न करता है।

Napunsakta Door Karne Ke Desi Ayurvedic Upay

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4. अकरकरा 20 ग्राम, शुद्ध कुचला 7 ग्राम, सौंठ 20 ग्राम, कस्तूरी डेढ़ ग्राम, जायफल 3 ग्राम, अम्बर डेढ़ ग्राम, लौंग 3 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियां एकत्र करें और कूट-पीसकर एक जान कर लें। चूर्ण हो जाने के पश्चात् पान के रस में खूब खरल करें। जब संतोषजनक खरल हो जाये, तब जंगली बेर के बराबर गोलियों का निर्माण कर लें। 1-1 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का पीड़ित को निर्देश दें। ये गोलियां नपुंसकता-नामर्दी, शीघ्रपतन, वीर्य के विकार, वीर्य पतला हो जाना आदि विकारों को नष्ट कर शरीर में अपूर्व शक्ति-बल का संचार हो जाता है। असक्षम रोगी समक्षम हो जाता है। इसके सेवन से वीर्य की कमी दूर होत है। ऊपर से दूध सेवन कराना हितकर है।

5. गोखरू, लौंग, तज, गिलोय सत्व, सफेद मूसली, मुलहेठी, बिदारीकंद और चमेली के जड़ की छाल प्रत्येक 25-25 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियां प्राप्त कर एकत्र करें। सभी औषधियों को कूट-पीसकर एक जान चूर्ण करें और छान लें। छन जाने के उपरान्त इस चूर्ण को किसी शीशी में सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण की मात्रा 2-3 ग्राम प्रतिदिन की होती है। यह मात्रा दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार चूर्ण सेवन करने के उपरान्त ऊपर से गर्म दूध पीन हितकर सिद्ध होता है। इनकी प्रभावशक्ति अतिशय प्रबल शक्तिशाली होती है। इस चूर्ण को सेवन कराने से कमजोर एवं दुर्बल रोगी शक्तिशाली हो जाता है। इसके प्रयोग से बलवीर्य बढ़ता है तथा नपुंसकता नष्ट होती है।

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केवल पुरूषों के लिए हिंदी में ब्लाॅग, जानिए नपुंसकता क्या है? और नपुंसकता का इलाज (Napunskata Ka Ilaj or Impotence Treatment Hindi). Mob : 9211166888
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