Namardi Ka Desi Ilaj

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नपुंसकता क्या होती है?

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सीधे सरल शब्दों में नपुंसकता पुरूष की उस अवस्था या कमजोर कड़ी को कहते हैं, जिसमें वह किसी स्त्री अथवा पत्नी के साथ संभोग करने के लायक नहीं रहता है। नपुंसकता को नामर्दी (Impotency) से भी संबोधित किया जाता है, क्योंकि इस समस्या में चाहकर भी पुरूष के लिंग (Penis) में पर्याप्त तनाव नहीं आ पाता, जिस कारण वह सेक्स (Sex) करने के लिए तैयार नहीं हो पाता और स्त्री भी ऐसे पुरूष से दूरी बनाने लगती है।

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ऐसा नहीं है कि पुरूष की सेक्स करने की इच्छा नहीं होती। काम के प्रति इच्छा तो मन में जागृत होती है और उत्तेजना भी पूरी होती है, लेकिन लिंग में तनाव नहीं आने के कारण वह संभोग (Sambhog) करने की स्थिति में नहीं आ पाता और ऐसे ही पुरूषों को लोग नपुंसकता से पीड़ित या नामर्द कहकर ताना मारने लगते हैं। कभी-कभी तो पुरूष के अंदर इतनी हीनभावना घर जाती है, कि वह स्त्री के समीप जाने से भी कतराने लगता है। उसे हर वक्त सेक्स के दौरान अपने असफल रहने का डर सताता रहता है। उसके अंदर आत्मविश्वास की कमी हो जाती है।

नपुंसकता का विवाहित जीवन पर प्रभाव-

नपुंसकता के कारण पुरूष के विवाहित जीवन पर बहुत गहरा व गंभीर प्रभाव पड़ता है अथवा पड़ने की संभावना बनी रहती है। दरअसल उम्र के एक पड़ाव में सेक्स सुख पाना हर स्त्री और पुरूष का अधिकार हो जाता है यहां तक कि जरूरत बन जाती है। जिंदगी के लिए जैसे भोजन जरूरी है, ठीक उसी तरह जीवन को पूरी तरह से जीने के लिए स्त्री और पुरूष के लिए सेक्स व संभोग की तृप्ति (Sex Satisfaction) भी उतना ही जरूरी है।
सेक्स में जब दोनों (स्त्री-पुरूष) में से कोई भी एक पूर्ण तृप्ति व चरमसुख (Orgasm) प्राप्त नहीं कर पाता है, तो रिश्तों में कड़वाहट आना स्वाभाविक हो जाता है। पति-पत्नी के बीच कलह होने लगती है, पत्नी, पति से घृणा करने लगती है, यहां तक कि कई स्त्रियां तो पराये पुरूषों के सम्पर्क में जाने से भी नहीं कतराती हैं, जिसे हमारे समाज में अवैध संबंध कहा जाता है और इसे बुरी दृष्टि से देखा जाता है। समाज इसका विरोध करता है। कुल मिलाकर विवाहित जीवन बर्बाद हो जाता है और विवाहित जीवन की खुशियों को ग्रहण लग जाता है।

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यहां बता दें कि हमारा उद्देश्य किसी पुरूष भाई व पुरूष रोगी को डराना व चिंताग्रस्त कर देने का बिल्कुल नहीं है। हमारा तो केवल एक मात्र उद्देश्य पुरूषों को अपनी सेक्सुल लाईफ और समस्या के प्रति जागरूक करना है कि बुरी आदतों, गलत खान-पान और अनियमित जीवन शैली को वक्त रहते बदलें, ताकि उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार की सेक्स समस्या न हो। विशेषकर जो अविवाहित हैं और जल्द ही विवाहित जीवन में कदम रखने वाले हैं, उन्हें इस लेख से सीख लेने की अति आवश्यकता है।

नपुंसकता से घबरायें नहीं-

नपुंकसता से डरने और घबराने की कोई बात नहीं है। इसका इलाज आयुर्वेद से संभव है। बस आप समय रहते इलाज करायें और चिकित्स द्वारा बताये गये निर्देशों का पालन करें, परहेज करें। आप पूरी तरह स्वस्थ हो जायेंगे और विवाहित जीवन का पूरा-पूरा आनंद ले पायेंगे।

नपुंसकता के प्रकार क्या हैं?

वैसे तो नपुंसकता कई प्रकार की होती है जैसे- शारीरिक नपुंसकता, मानसिक नपुंसकता, वृद्धावस्थाजन्य नपुंसकता, जननेन्द्रियों के पूर्ण विकास न होने के कारण उत्पन्न नपुंसकता, अति संभोगजन्य नपुंसकता।

नपुंसकता में खान-पान का ऐसे रखें ध्यान-

1. कामशक्ति कम होने पर बहुत से लोग गरिष्ठ व माँसाहारी भोज्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन करने लगते हैं। इससे कोई लाभ नहीं होता है, बल्कि पाचन विकार उत्पन्न होते हैं, पेट में गैस बनने लगती है, कब्ज़ रहने लगती है तथा चर्बी बढ़ने लगती है।

2. रोगी का भोजन हल्का, सादा, शाकाहारी व सुपाच्य होना चाहिए। मौसम के फलों व सब्जियों का भोजन में मुख्य स्थान होना चाहिए।

3. 80 प्रतिशत भोजन क्षारीय एवं 20 प्रतिशत भोजन अम्लीय होना चाहिए। इसी अनुपात से क्षारीय व अम्लीय भोज्य पदार्थों को ग्रहण करना चाहिए।

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4. प्रतिदिन भोजन के साथ भरपूर मात्रा में सलाद सेवन करना चाहिए। रोज 40-50 ग्राम अंकुरित अनाज (गेहूँ/चना/मूँग) सेवन करना चाहिए।

5. पानी भी प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए, ताकि भोजन को अच्छे से पचने में आसानी हो, शरीर को पूर्ण पोषण प्राप्त होता रहे तथा रस रक्तादि सप्तधातुओं का सम्यक निर्माण होता रहे।

6. पाचन संबंधी कोई विकार हो तो सबसे पहले उसे उचित चिकित्सा द्वारा दूर करना चाहिए, ताकि पाचन ठीक हो जाये। उसके बाद आयुर्वेद के सेक्सोलाॅजिस्ट द्वारा सुझाये औषधियों का सेवन करना चाहिए, ताकि आपकी नामर्दी पूरी तरह जड़ से समाप्त हो सके।

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