In Gharelu Upcharon Se Karen Door Napunsakta

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इन घरेलू उपचारों करें दूर नपुंसकता

नपुसंकता-

Napunsakta Ka Ilaj, Namardi Ka Ilaj, Treatment of Impotency, Erectile Dysfunction

स्त्री सहवास की शक्ति का एकदम से घट जाना या थोड़ा घट जाने को नपुंसकता कहते हैं। नपुंसकता पुरूष की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें वह रतिक्रिया(स्त्री के साथ संभोग) करने में असमर्थ हो जाता है। नपुंसकता में पुरूषांग शिथिल, दुर्बल, कृश तथा लघु या निस्तेज हो जाता है। यह जीवन के आनंद तथा सुख को हर लेती है। सेक्स की इच्छा होन पर लिंग उत्तेजित नहीं हो पाता है। यानी मन में संभोग की इच्छा तो प्रबल रूप से होती है, मगर लिंग में प्रबलता व कठोरपन पूरी तरह से नहीं आ पाता, जिस कारण वीर्य असमय ही स्खलित हो जाता है।

मगर वास्तविक नपुंसकता में तो कठोरपन व कड़कपन बिल्कुल नहीं आता और पुरूषांग की उत्थान-शक्ति बिल्कुल ही नहीं रहती है। ऐसा व्यक्ति जीवन की अपेक्षा मृत्यु को अच्छा समझने लगता है। पुरूष प्रत्येक अनादर को सहन कर सकता है, मगर पत्नी या प्रेमिका के साथ प्रसंग में असफलता नहीं सहन कर सकता। इस रोग के लग जाने पर जवानी में बुढ़ापा शीघ्र आ जाता है।

अधिकतर लोग शीघ्रपतन तथा मर्दाना बांझपन को नपुंसकता समझते हैं, लेकिन यह उनका मात्र भ्रम है। इनमें आपस में काफी भिन्नता है। शीघ्रपतन रोग में पुरूषांग में कठोरपन व तनाव पूरी तरह से तो आता है, लेकिन संभोग के दौरान कुछ ही पलों में स्खलित हो जाता है, जिससे स्त्री अतृप्त रह जाती है। इस प्रकार शीघ्रपतन, नपुंसकता तो नहीं होती है, मगर शीघ्रपतन पर नियंत्रण न कर पाने के कारण यह रोग कुछ समय पश्चात् व्यक्ति को नपुंसक अवश्य बना सकता है।

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नपुसंकता का आरम्भ स्तम्भन शक्ति में कमी से होता है, परन्तु उत्तेजना निर्लेप होती है, बल्कि अधिक बार होने लगती है। एक ही दिन में कई बार उत्तेजना होती है। परन्तु युवकों को यह भली-भांति जान लेना चाहिए कि दृढ़ तथा बार-बार होने वाली उत्तेजना यदि शीघ्रपात युक्त हो तो प्रायः नपुंसकता के निकट होने का संकेत होता है। अतः ऐसे नवयुवकों को जिन्हें उत्तेजना बार-बार होती हो, परन्तु हर बार स्खलन शीघ्र हो, तो तत्काल विश्वस्त चिकित्सक की शरण में जाना चाहिए।

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नपुंसकता के प्रकार :

नपुंकसता दो प्रकार की होती है-
1. अस्थाई- यह अतिमैथुन, गुदामैथुन, पशु-पक्षी मैथुन एवं वेश्यागमन आदि से अपने वीर्य का नाश करके होती है। यह नामर्दी रोग साध्य है। इस प्रकार की नपुंसकता कई बार मानसिक कारणों एवं औषोधियों के दुष्प्रभाव स्वरूप भी होती है।

2. जन्मजात नपुंसकता- अंडकोष का विकसित होना। इनकी परिगणना ही जड़ों में होती है और इसका कुछ भी उपचार संभव नहीं है। पिता के वीर्यदोष या अल्पवीर्य के कारण ‘हिजड़ा’ उत्पन्न हुई संतान की नामर्दी(हिजड़ापन) असाध्य है।
अंडकोषों के विकास में त्रुटि या कमी होना या अण्डसार जैसी औषधि से ठीक हो सकती है।
स्थाई नामर्दी जीर्ण एवं उग्र मधुमेह के कारण भी हो जाती है। जब पुरूष में केवल स्त्री संगम करने की शक्ति ही उत्पन्न न हो तो उसे नामर्दी कहते हैं। इसके कारण एवं चिकित्सा नामर्दी के समान है। इसे काम वैराग्य भी कहते हैं।

नामर्दी के कारण संक्षेप में-

1. आयु का बढ़ना(वृद्धावस्था)।
2. मानसिक कारण(जैसे- भय, घृणा आदि)।
3. कोई रोग(जैसे- मधुमेह)।
4. अति प्राकृतिक-अप्राकृतिक मैथुन।
5. औषधियों का दुष्प्रभाव(जैसे- उच्च रक्तचाप की औषधियों का दुष्प्रभाव, शामक औषधियों का दुष्प्रभाव)।
6. लिंग की नसों का कुचल जाना/कट जाना।
7. नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन।
8. कुपोषण।
9. आवश्यकता से अधिक ब्रह्मचर्य पालन।
10. अत्यधिक शीत, रूक्ष, उष्ण पदार्थों का सेवन, संयोग विरूद्ध आहार।
11. पाचन संबंधी विकार।
12. जन्मजात विकृति।
13. उपदंश, सुज़ाक आदि का विष प्रभाव।

नामर्दी का घरेलू उपचार

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1. असगंध और विधारा बराबर-बराबर लेकर महीन चूर्ण कर लें। 3 से 5 ग्राम सुबह-शाम शहद मिलाकर चाटें तथा ऊपर से सुखोष्ण मीठा दूध पियें। इससे बल-वीर्य की खूब वृद्धि होती है, स्नायु दुर्बलता दूर होती है तथा शरीर हष्ट-पुष्ट हो जाता है। यह उत्तम रसायन है। इसके सेवन से वातरोग, मस्तिष्क की कमजोरी, वृद्धावस्था की दुबर्लता, अत्यधिक संभोग के कारण हुई दुर्बलता आदि अनेक रोगों में लाभ होता है। इसे अश्वगंधादि चूर्ण कहते हैं।

2. गोखरू और काले तिल समान मात्रा में बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। 5-5 ग्राम प्रतिदिन सुबह-शाम दूध में औटाकर मिश्री चूर्ण मिलाकर लें। इससे बल-वीर्य की खूब वृद्धि होती है एवं नामर्दी का नाश होता है।

3. उड़द की धुली दाल को लें। इसमें से 20 ग्राम लेकर कड़ाही में 1 बड़ा चम्मच घी डालकर उसे लाल होने तक भूनें। फिर 250 ग्राम दूध डाल कर हलवा तैयार करें। हलवा तैयार हो जाने पर चीनी 20 ग्राम मिलाकर उतार लें। इसे सुबह के नाश्ते में खायें तथा ऊपर से दूध एक पाव पियें। इससे वीर्य की खूब वृद्धि होती है तथा कामशक्ति बढ़ती है।

4. दूध में शुद्ध किये हुए कौंच के बीज(छिल्का रहित) 10 ग्राम, सफेद मूसली 20 ग्राम, मखाने की ठुड्डी(छिल्का रहित) 40 ग्राम, मिश्री 50 ग्राम। महीन चूर्ण तैयार कर आपस में मिला लें। इसे कामदेव चूर्ण कहते हैं। इसके सेवन से वीर्य की वृद्धि होती है, वीर्य गाढ़ा होता है एवं मैथुन में आनंद आता है। 5-5 ग्राम सुबह-शाम सुखोष्ण मीठे दूध के साथ लें। वीर्य को बढ़ाकर यौन दुर्बलता और धातुक्षीणता को दूर करने वाला उत्तम योग है। लगातार कुछ दिन तक लें।

5. सूखे आंवलों के चूर्ण में ताजे आंवलों के रस की 21 भावना देकर कूटकर सुखा लें। इसे आमलकी रसायन कहते हैं। इसमें समभाग असगंध नागौरी चूर्ण भी मिला लें। इसके सेवन से बल-वीर्य की खूब वृद्धि होती है एवं नामर्दी का नाश हो जाता है। इसे लगातार 5-6 महीने तक सुबह-शाम 5-5 ग्राम सुखोष्ण मीठे दूध के साथ लें। यह देखने में साधारण लेकिन उत्तम योग है। बिना किसी रोग के भी शक्ति संवर्द्धनार्थ इसका सेवन किया जा सकता है।

6. असगंध, कौंच बीज, तालमखाना, सफेद मूसली और मिश्री बराबर-बराबर लेकर बारीक कर लें। 5-5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लें। इसके सेवन से वीर्य की वृद्धि होती है, नामर्दी का नाश होता है तथा कामशक्ति की वृद्धि होती है।

7. यदि आप काम के बोझ से थक जाते हैं, बार-बार फुर्ती के लिये चाय का सेवन करते हैं, आलस्य आता है, रात में भोजन के बाद बिस्तर पर निढाल हो जाते हैं और शरीर में शक्ति महसूस नहीं होती और न ही संभोग की इच्छा होती है, तो ऐसी दशा में आप चाय का सेवन बंद कर दें और उसके स्थान पर सुखोष्ण दूध एक या आधे कप में चैथाई चम्मच अश्वगंधा तथा चीनी मिलाकर दिन में 3-4 बार घूंट-घूंट कर के पियें। एक सप्ताह के बाद ही अंतर प्रतीत होगा।

8. 4 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच शुद्ध शहद, 3 चम्मच अदरक का रस, 1 चम्मच देसी घी। इन चारों को आपस में मिला लें। 2-2 चम्मच प्रतिदिन 3 सप्ताह तक लें। नामर्दी में लाभ करता है। एक बार में ही अधिक मात्रा में तैयार न करें।

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9. गोखरू, तालमखान, शतावर, कौंच के बीज, बड़ी खरेंटी तथा गंगरेन बराबर-बराबर लेकर महीन कर लें। 5-5 ग्राम सुबह-शाम सुखोष्ण मीठे दूध के साथ लगातार 3-4 बार चार मास तक लें। यौनशक्ति वर्धक योग है।

10. कौंच बीज छिल्का रहित और गेहूं समान मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लें। 10 ग्राम आधा किलो दूध में खूब उबालें। जब दूध उबल कर एक पाव रह जाये, तब मिश्री का चूर्ण 10 ग्राम मिलाकर उतार लें। सुखोष्ण रहने पर इसे घूंट-घूंट करके पियें। इससे काम-शक्ति की खूब वृद्धि होती है।

11. प्याज एवं अदरक का रस समभाग प्रतिदिन सुबह-शाम प्रयोग करने से कुछ ही मास में खाई हुई जवानी वापिस आ जाती है। प्याज कामवासना को जाग ृत करता है, वीर्य पैदा करता है तथा मनुष्य में उत्तेजना पैदा करके देर तक मैथुनरत रहने की शक्ति प्रदान करता है।

12. तुलसी के बीज या जड़ का चूर्ण बनाकर समान भाग पुराना गुड़ मिलाकर 1.50 से 3 ग्राम तक सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लेने से एक मास के अंदर नामर्दी दूर हो जाती है।

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केवल पुरूषों के लिए हिंदी में ब्लाॅग, जानिए नपुंसकता क्या है? और नपुंसकता का इलाज (Napunskata Ka Ilaj or Impotence Treatment Hindi). 9211166888
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Chetan Anmol Sukh
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