Napunsakta Ki Ayurvedic Dawa

Napunsakta Ki Ayurvedic Dawa

नपुंसकता की आयुर्वेदिक दवा

नपुंसकता या नामर्दी
(Impotency)

नपुंसक किसे कहते हैं? या नपुंसकता क्या होती है?

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नपुंसक उस पुरूष को कहते हैं, जो संभोग में ढीला व असमर्थ रहता है या फिर संभोग की इच्छा होने पर भी जिसके लिंग में पूर्ण तनाव व उत्तेजना नहीं आ पाती। यदि थोड़ी-बहुत उत्तेजना प्रयास करने पर आ भी जाये, तो स्त्री का आलिंगन करते ही वीर्यपात होकर बेजान हो जाता है। मुख्य रूप से संभोग क्रिया लिंग की कठोरता व सख्ती पर निर्भर होती है। यदि लिंग में ही दृढ़ता व सख्ती न हो तो ऐसे पुरूष को नपुंसक या नामर्द ही कहा जा सकता है।
नामर्दी कई तरह की होती है और यह भी आवश्यक नहीं कि हर पुरूष एक जैसी नामर्दी का शिकार हो। एक नपुंसकता जन्मजात होती है, जिसका दुनियां में कोई इलाज नहीं है। दूसरी अल्पायु में किसी कारण से अचानक दुर्घटना वश प्रजनन अंगों पर चोट लगने से भी होती है। तीसरी स्थिति अचानक हस्तमैथुन एवं वीर्य की बर्बादी से होती है।

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इसके अतिरिक्त शरीर की अन्य व्याधियों जैसे जिगर, मेदा, गुर्दे की कमजोरी तथा मधुमेह के कारण भी नपुंसकता उत्पन्न हो जाती है। अत्यधिक अफीम, शराब व अन्य नशीले मादक पदार्थों के सेवन से भी नपुंसकता का आक्रमण हो जाता है। जन्मजात नपुंसकता को छोड़कर बाकी सभी तरह की नपुंसकता का इलाज संभव है।
ऐसी स्थिति में अपने दिल-दिमाग का संतुलन न बिगड़ने दें तथा अपने मन से यह भावना और डर निकाल दें कि अब तो जवानी की पतंग कट चुकी है। यह सोचकर इस कमज़ोरी को भाग्य के भरोसे न छोड़ें, बल्कि नपुंसकता का सही कारण जानने की कोशिश करें तथा अपना उचित व लाभकारी इलाज किसी योग्य चिकित्सक से लेकर नामर्दी से छुटकारा पा लें।

मधुमेहजन्य नपुंसकता-

अग्नाश्य में इंसुलिन नामक हार्मोन कम अथवा पैदा न होने पर मधुमेह रोग उत्पन्न हो जाता है। मधुमेह से तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है और रक्त नलिकायें संकरी हो जाती है, जिसके कारण लिंग में पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं हो पाता और पुरूष नपुंसक हो जाता है।

कारण-

हस्तमैथुन, अप्राकृतिक मैथुन, शीघ्रपतन, मधुमेह एवं हृदय रोग, मोटापा, यकृत विकार, मस्तिष्क की विकृति, चिंता(तनावग्रस्त) आदि।

परिणाम-

पहले मिलन में ही स्त्री के सामने नामर्द साबित हो जाना, जवानी में ही बुढ़ापा आ जाना, संतानमुख से वंचित रहना आदि।

लक्षण-

मैथुन करने में अक्षम हो जाना ही इस रोग का प्रधान लक्षण है, सिरदर्द, घबराहट, बेचैनी, व्याकुलता, धड़कन बढ़ना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन आदि।

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नामर्दीनाशक योग-

Napunsakta Ki Ayurvedic Dawa

1. सफेद प्याज का रस 8 मि.ली., अदरक का रस 6 मि.ली., शहद 4 ग्राम और देसी घी 3 ग्राम। ऐसी प्रतिदिन एक-एक ग्राम मात्रा 2 मास तक सेवन करने से नामर्द भी मर्द बन जाता है।

2. प्याज का रस 3 मि.ली., घी 4 ग्राम और शहद 3 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चाटने से और रात को मिश्री या चीनी मिला आधा लीटर दूध प्रतिदिन पीने से 2-3 मास में अपूर्व चमत्कार देखा जाता है। नामर्द भी अपूर्व वीर्यवान बन जाता है।

3. कौंच के बीज छिलका रहित या तालमखाने के बीजों का चूर्ण 6-6 ग्राम और मिश्री चूर्ण 10 ग्राम मिलाकर फाँककर ऊपर से धारोष्ण दूध पीने से बल-वीर्य बढ़ता है और कभी कम नहीं होता है।

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4. उड़द की दाल के बेसन की खीर में देसी घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से भी लाभ होता है। लगातार दो मास के सेवन से एक वृद्ध में भी जवान जैसा जोश(कामोत्साह) आता है।

5. बिदारीकन्द का चूर्ण, घी, दूध और गूलर के रस के साथ मिश्री का योग देकर पीने से वृद्ध भी जवान जैसा कामोत्साही हो जाता है। नपुंसक में भी जिसे संभोग की इच्छा नहीं होती, उसमें भी इच्छा जागृत हो जाती है।

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6. पीपल और मिश्री का समभाग चूर्ण बना लें। दिन में खार 6 ग्राम लेकर ऊपर से दूध पीने से अपूर्व बल और वीर्य की वृद्धि होती है।

7. प्याज का रस और शहद मिलाकर प्रतिदिन चाटने से वीर्य की वृद्धि होती है और कामशक्ति भी पुनः जागृत हो जाती है।

8. एक बताशे में बड़ का दूध भरकर प्रतिदिन खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।

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