Napunsakta Khatam Karne Ki Desi Ayurvedic Dawa

Napunsakta Khatam Karne Ki Desi Ayurvedic Dawa

नपुंसकता खत्म करने की देसी आयुर्वेदिक दवा

नपुंसकता, नामर्दी(Impotency)

नामर्दी व नपुंसकता पुरूषों में पाई जाने वाली वो समस्या या रोग है, जिसमें पुरूष, किसी भी स्त्री अथवा अपनी पत्नी के साथ संभोग करने में असक्षम होता है। किसी प्रकार संभोग करने की कोशिश भी करे, तो पूर्ण रूप से उत्तेजना न आने के कारण स्त्री को संतुष्ट कर पाने में विफल रहता है। इस समस्या में पुरूष के लिंग में भरपूर तनाव नहीं आ पाता और यदि स्त्री द्वारा प्रयास करने पर थोड़ा सा तनाव आ भी जाये, तो तुरन्त ही शीतल होकर बेजान हो जाता है।
नपुंसकता के चलते पति-पत्नी के रिश्ते भी कड़वाहट आने लगती है। पत्नी के सामने शर्मिन्दा होना पड़ता है। ऐसे पुरूष, स्त्री के पास जाने से भी कतराने लगते हैं। यदि कोई स्त्री इनके पास आये तो, यह घबराने लगते हैं, नजरें चुराने लगते हैं।

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नपुंसकतानाशक योग-

Napunsakta Khatam Karne Ki Desi Ayurvedic Dawa

1. नपुंसक को लाल मिर्च, खटाई, नमकीन, खारे और गर्म पदार्थ आदि से परहेज करवायें।

2. कच्ची-पक्की बंग भस्म, सीसा भस्म, लौह भस्म एवं भाँग, चरस, अफीम एवं इनके मिश्रित योगों को मत दें। ये क्षणिक उत्तेजना दे भी तो आगे अति अनिष्टकारक सिद्ध होगा।

3. बिदारीकन्द में बिदारीकन्द के स्वरस की भावना देकर गाय के दूध में मिश्री 3 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन दो बार दें।

4. आमलों में आमलों के स्वरस की सात भावना देकर और सुखाकर शहद के साथ या बराबर घी के साथ प्रतिदिन दें। नपुंसकता दूर होगी।

5. बिदारीकन्द और गोखरू का चूर्ण समभाग मिश्रित योग तैयार कर लें। 10 ग्राम प्रतिमात्रा प्रतिदिन दो बार मिश्री मिले योग के साथ दें अथवा बिदारीकन्द, गोखरू और मिश्री का समभाग चूर्ण बना लें। 10-10 ग्राम सुबह-शाम धारोष्ण दूध के साथ दें।

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6. वीर्य के अभाव में नपुंसकता- दूध, घी, उड़द की दाल के लड्डू, आम्रपाक, असगन्धपाक, मिश्री मिला गाय का दूध, बादाम का हलुवा गोखरूपाक आदि विशेष रूप से सेवनीय है।

7. वृक्कों(गुर्दों) को स्वस्थ रखें, क्योंकि जब तक वृक्क बलवान नहीं होते, कामेच्छा भी नहीं होती है। वृक्क जितने बलवान होंगे, चेतना उतनी ही अधिक होगी।

8. असगन्ध और बिधारे का समभाग मिश्रित योग बना लें। 5-5 ग्राम मिश्री मिले गाय के दूध के साथ 3-4 मास तक सेवन करें। लाल मिर्च, नमक, खटाई से परहेज़ रखें। यह योग वृद्धों को जवान बनाता है। यदि वृद्धावस्था से कुछ पहले इसका सेवन प्रारम्भ कर दें, तो बाल सफेद नहीं होते हैं।

9. शीघ्रपतन- कबाबचीनी का चूर्ण 1 से 2 ग्राम प्रत्येक दो घण्टे बाद प्रतिदिन 6 मात्रायें 1 गिलास शीतल जल के साथ लगातार 8 दिन तक दें। बाद में प्रतिदिन 1-1 मात्रा शहद के साथ रात को सोने से पहले 14-21 दिन तक चाटें। शीघ्रपतन में लाभ होगा।

10. काले धतूरे की पत्तियों का रस टखनों पर लगायें। जब रस सूख जाये तब मैथुन करें। वीर्य जल्दी नहीं निकलेगा और संभोग में अधिक आनंद प्राप्त होगा।

11. चमेली के तेल में राई को पीसकर सुपारी को छोड़कर लिंग पर मलने से लिंग सख्त हो जाता है।

12. माँड, आक की जड़ और अकरकरा को बराबर-बराबर लेकर धतूरे के रस में पीसकर लिंग पर लगाने से लिंग खूब सख्त हो जाता है।

13. दालचीनी का तेल और लौंग का तेल समभाग मिलाकर या कोई एक अकेले भी सुपारी छोड़कर लिंग पर मलने से, लिंग का सूखना एक माह में ठीक हो जाता है।

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14. हरड़ को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर उसमें थोड़ी-सी रसोंते मिलाकर लेप लिंग पर लगाने से लिंग के तमाम दोष दूर हो जाते हैं।

15. तुलसी की जड़ का चूर्ण, घृत में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से नामर्दी में लाभ होता है। इससे शरीर के अंदर विद्युत्तीय क्रिया संचालित होती है।

16. गर्म तेलों में अम्बर मिलाकर लिंग पर मलने से ढीली और कमजोर नसें शक्तिशाली हो जाती है और मैथुन शक्ति बढ़ती है तथा संभोग में आनंद भी अधिक आता है। अम्बर की मात्रा 120 से 360 मि.ग्रा. तक हो। वृद्धों के लिए तो यह अमृत है।

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