Napunsakta Ke Ilaj Me Kya Upay Karna Chahiye

Napunsakta Ke Ilaj Me Kya Upay Karna Chahiye

नपुंसकता के इलाज में क्या उपाय करना चाहिए
नपुंसकता, नामर्दी(Impotency)

नपुंसकता में व्यक्ति(पुरूष) स्त्री के साथ संभो के लायक नहीं रहता है। नपुंसक पुरूष के लिंग में तनाव पूरी तरह नहीं आ पाता है, जिस कारण वह अपनी स्त्री व पत्नी को संतुष्ट करने में असफल रहता है। पहली बात तो नामर्द पुरूष के लिंग में पूरी तरह तनाव आता ही नहीं है और यदि आ भी जाये तो तुरन्त ही शिथिल भी हो जाता है। इस स्थिति में पुरूष को अपनी पत्नी व पार्टनर के सामने शर्मिन्दा होना पड़ता है। कई बार तो इस समस्या के चलते नव-दम्पत्ति के घर भी टूटते हुए देखे गये हैं।
जन्मजात नपुंसकता की कोई चिकित्सा नहीं होती है। यह असाध्य है। नपुंसकता एक गंभीर समस्या है। नपुंसकता मानसिक, शारीरिक तथा स्नायुविक तीन प्रकार की होती है। नपुंसकता कोई रोग नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार का लक्षण है जिसको दूर किया जा सकता है।
यहां कुछ जरूरी आयुर्वेदिक उपाय बताये जा रहे हैं, जिनका प्रयोग करने से नपुंसकता पूरी तरह से समाप्त हो जाती है और पीड़ित व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ, निरोग और सक्षम हो जाता है।

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आयुर्वेदिक उपाय-

Napunsakta Ke Ilaj Me Kya Upay Karna Chahiye

1. अदरक का कस 6 माशा, शहद 4 माशा, घी 3 माशा, सफेद प्याज का रस 8 माशा।
उपरोक्त चारों औषधियों को मिलाकर एक जान करें। यह जांचा परखा नुस्खा है। इसका प्रभाव तीव्र गति से होता है। यह नपुंसकता को नष्ट कर बलवीर्य कांति को बढ़ाने वाला अनोखा योग है। नपुंसकता के शिकार रोगियों के लिए यह रामबाण असर दिखाने वाला गुणकारी योग है। यह 2 माह तक सेवन करने का पीड़ित को निर्देश दें। उपरोक्त औषधियों को एक मात्रा के रूप में प्रयोग कराया जाता है। प्रातःकाल सभी को मिलाकर चाटने का निर्देश देना हितकर होता है।

2. तालमखाना 125 ग्राम, खरेटी बड़ी 125 ग्राम, कौंच के बीज की गिरी 125 ग्राम, शतावर 125 ग्राम, गोखरू 125 ग्राम, गंगरेन 125 ग्राम।
उपरोक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें और घोंट-पीसकर एक जान चूर्ण बनाने के बाद छान लें। यह चूर्ण अतीव लाभदायक सिद्ध होता है। मैथुन असमर्थ रोगियों के लिए यह चूर्ण रामबाण अचूक सिद्ध होता है। इसका प्रभाव निष्फल नहीं जाता। इसको सेवन कराने से अक्षम रोगी बलवीर्य कांतिवान बन जाता है। इसके प्रयोग से रोगी कई स्त्रियों के साथ संभोग करने में सफल हो जाता है। 6 माशा चूर्ण सेवन करने के बाद गर्म दूध पीने को रोगी को निर्देश दें। अति तीव्र नपुंसकता-नामर्दी, शीघ्रपतन तथा वीर्य विकार से रोगी पीड़ित हो तो एक तोला चूर्ण दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें। इस चूर्ण को 60 दिन तक अर्थात् 2 माह तक सेवन करने की सलाह दें।

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3. हिंगुल से निकला पारा एक तोला, शुद्ध अफीम एक तोला, सफेद संखिया एक तोला।
उपरोक्त तीनों औषधियों को एकत्र करें। इन तीनों की अलग-अलग कई घण्टे तक खरल करें। उसके पश्चात् एक साथ मिलकर खरल करें। इसको जितना अधिक खरल किया जायेगा, उतना ही श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है। पारे की चमक खत्म होने तक खरल करते रहना कत्र्तव्य है। खरल हो जाने से यह सुरमे की भांति बारीक-महीन बन जाये तब इसको प्रयोग के योग्य समझना चाहिए। इसकी मात्रा आधा चावल भर होती है। यह मात्रा रात को सोते समय अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। आधा चावल भर मात्रा मक्खन या मलाई में लपेट कर सेवन कराना हितकर सिद्ध होता है। च्यवनप्राश में लपेट कर भी प्रयोग करने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके प्रयोग से जबरदस्त मर्दाना शक्ति उत्पन्न होती है। रोगी यौन तृप्ति अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग रामबाण अचूक है, इसलिए निष्फल नहीं होता।

4. अफीम 3 माशा, केसर 4 रती, इलायची बीज एक माशा, पोस्त डोडा 2 नग, भांग 8 माशा, अजवाइन 5 माशा, कद्दू बीज 5 माशा, भुने चने 7 माशा, इसबंद 9 माशा।
उपरोक्त सभी औषधियाँ एकत्र करें। इस योग की प्रभाव शक्ति अति प्रबल शक्तिशाली होती है। यह तीव्र गति से नपुंसकता का नाश करके रोगी के शरीर में बलवीर्य एवं कांति उत्पन्न करता है। समस्त औषधियों को घोंट-पीसकर एक जान चूर्ण कर लें। उसके पश्चात् छान लें। छन जाने के बाद पोस्त के डोडों को पानी में भिगोकर अच्छी तरह मसल कर इसका रस निकाल लें। उपरोक्त औषधियों के चूर्ण को पोस्त के पानी में खरल करें और बेर के बराबर गोलियों का निर्माण कर लें। एक गोली दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ अर्जित हो जाता है। यह योग परीक्षित है। निश्चय ही लाभ करता है। गोली खाने के पश्चात् ऊपर से दूध भी पीने की सलाह दें।

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5. अकरकरा 20 ग्राम, सोंठ 20 ग्राम, जायफल 3 ग्राम, लौंग 3 ग्राम, शुद्ध कुचला 7 ग्राम, कस्तूरी डेढ़ ग्राम, अम्बर डेढ़ ग्राम।
उपरोक्त सभी औषधियाँ एकत्र करें और घोंट-पीसकर एक जान कर लें। चूर्ण हो जाने के बाद पान के रस में खूब खरल करें। जब संतोषजनक खरल हो जाये, तब जंगली बेर के बराबर गोलियों का निर्माण कर लें। ये गोलियाँ नपुंसकता, शीघ्रपतन, वीर्य के विकार, वीर्य पतला हो जाना, वीर्य कमजोर दुर्बल हो जाना आदि विकारों को नष्ट कर देती है। रोगी के शरीर में अपूर्व शक्ति-बल का संचार हो जाता है। अक्षम रोगी सक्षम हो जाता है। इसके प्रयोग से वीर्य की कमी दूर होती है। एक-एक गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। गोली प्रयोग करने के उपरान्त ऊपर से दूध प्रयोग कराना हितकर है।

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