Namardi Se Chutkara Pane Ke Ayurvedic Upay

Namardi Se Chutkara Pane Ke Ayurvedic Upay

नामर्दी से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय

नपुंसकता(Impotency)-

नपुंसकतानाशक आयुर्वेदिक योग-

जो पुरूष पूर्ण तृप्ति के साथ मैथुन करने में असमर्थ हो जाते हैं, वे चिकित्सकीय दृष्टिकोण से नपुंसक माने जाते हैं। उपार्जित नपुंसकता की चिकित्सा संभव है, किन्तु जन्मजात नपुंसकता की चिकित्सा संभव नहीं है। यह असाध्य है। नामर्दी एक गंभीर समस्या है। नपुंसकता मानसिक, शारीरिक तथा स्नायुविक तीन प्रकार की होती है।

ध्यान रहे कि नपुंसकता कोई रोग नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार का उपार्जित लक्षण है, जिसको दूर किया जा सकता है। पाठकों की जानकारी के लिए नीच कुछ महत्वपूर्ण योग प्रस्तुत किये जा रहे हैं, जिनके प्रयोग से नामर्दी पूर्ण रूप से नष्ट हो जाती है और रोगी पूर्ण स्वस्थ, हृष्ट-पुष्ट, कामोत्तेजक, सबल एवं मैथुन में सक्षम हो जाता है।

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Namardi Se Chutkara Pane Ke Ayurvedic Upay

1. योग- तालमखाना, बड़ा गोखरू, श्वेत मूसली, काली मूसली, गिलोय सत्व, कौंच के बीज की गिरी, शतावर, असगंध, खरैंटी, समुद्रसोख, बरियारा की जड़, कामराज, बीजबंद, सिम्बल मूसली, छोहारा प्रत्येक 100 ग्राम। मिश्री डेढ़ किलोग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियों को कूट-पीसकर एक जान कर लें। जब सभी बारीक हो जायें, तब पिसी हुई बारीक मिश्री मिलाकर सम सर्वत्र कर लें। घुट-पिस जाने के उपरान्त यह नपुंसकतानाशक अति उपयोगी, प्रभावशाली एवं श्रेष्ठ गुणकारी चूर्ण बन जाता है। इसका प्रभाव तीव्र गति से होता है और रोगी पूर्ण सक्षम-समर्थ हो जाता है। अप्राकृतिक मैथुन करने से होने वाली नपुंसकता के लिए यह योग अति उत्तम कार्य करता है। 6 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें। यह योग समस्त प्रकार की दुर्बलता भी दूर कर देता है। इसके प्रयोग से रोगी बल, वीर्य, ओज एवं कांति को प्राप्त करता है।

2. योग- नागकेसर, खुरासानी अजवायन, छोटी इलायची दाना, जावित्री, जायफल, मस्तगी, मोबरस, केसर, छालिया, गुग्गल और तबाशीर प्रत्येक 50-50 ग्राम लेवें।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियां एकत्र करें और घोंट पीसकर एक जान करें और छान लें। उसके पश्चात् इस चूर्ण से चने के बराबर गोलियों का निर्माण कर लें। यह गोलियां अतिशय उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करती है। इन गोलियों के प्रभाव से नपुंसकता, नामर्दी का अंत हो जाता है और रोगी पूर्ण सक्षम-समर्थ तथा शक्तिशाली हो जाता है। यह योग शीघ्रपतन तथा वीर्य के विकार भी नष्ट कर देता है। यह रामबाण असर दिखाता है और पीड़ित रोगी को निरोग कर देता है। 1-1 गोली दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। गोली सेवन करने के बाद दूध सेवन कराने से आशातीत लाभ होता है। यह कमजोर, दुर्बल, क्षीणकाय एवं नपुंसक रोगियों को बलवान बना देती है।

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3. योग- केसर, सच्चे मोती, सोने के वर्क, चाँदी के वर्क, सत शिलाजीत, सत लोबान, अम्बर तथा कटा आब्रेशय प्रत्येक 12-12 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियों को पान के अर्क में पीसकर सम सर्वत्र एवं महीन कर लें। उसके पश्चात् बाजरे के आकार की गोलियों का निर्माण कर लें। जब गोलियां बन जायें, तब उन पर सोने का वर्क चढ़ा लें। इस गोली का प्रभाव तीव्र गति से होता है और नपुंसक रोगी पूर्ण सक्षमता के साथ मैथुन करके आनंद एवं उपयोगी व तृप्ति प्राप्त करने में सफल होने लगता है। 1-1 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। हलवे में लपेट कर सेवन कराना हितकर है। ऊपर से गाय का दूध पीने को दें।

4. योग- अकरकरा 25 ग्राम, ऊंटकटा की जड़ की छाल 25 ग्राम, असगंध नागौरी 100 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियां एकत्र करें। तीनों औषधियों को घोंट-पीसकर बारीक चूर्ण कर लें। 8-10 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार दूध से अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। यह चूर्ण नामर्दी का नाश कर रोगी को पूर्ण शक्तिशाली और सक्षम बना देता है। कुछ ही दिन के प्रयोग से पीड़ित रोगी बलवीर्य तथा कांतिवान हो जाता है। यह अद्वितीय शक्तिप्रद चूर्ण है। यह तीव्र गति से असर करता है। यह मांसपेशियों को ताकत प्रदान करता है। इसका सेवन निष्फल नहीं होता।

5. योग- आंवला, पीपर, सौंठ, चीता, सम्बल मूसली, काली मिर्च, छोटी हरड़, बहेड़ा और साद प्रत्येक 30-30 ग्राम लें। गंदना बीज, सोये के बीज 12-12 ग्राम, शुद्ध लौह मैल(किट्ट) 300 ग्राम, बादाम तेल आवश्यकतानुसार, शहद 650 ग्राम तथा कस्तूरी 6 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त शुद्ध लौह मैल की समस्त औषधियों को एकत्र कर कूट-पीसकर सूक्ष्म कर लें। उसके पश्चात् छान लें। तत्पश्चात् इन औषधियों से बने चूर्ण में बादाम का तेल धीरे-धीरे मिलाकर घोंटते जायें। जब चिकना हो जाये, तब उसमें शहद तथा कस्तूरी मिलाकर घोंट कर एक जान कर लें। जब अच्छी तरह मिलकर एक जान हो जाये, तब उसको एक बड़े मुंह के ढक्कनदार साफ-सुथरी शीशी में भरकर रख लें। यह अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ फल देने वाला माजून है, जो नामर्दी, शीघ्रपतन, वीर्य के विकार आदि को नष्ट कर देने की अद्भुत क्षमता रखता है।

Namardi Se Chutkara Pane Ke Ayurvedic Upay

माजून बन जाने के बाद तुरन्त इसको सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि इसको किसी सुरक्षित स्थान पर 6 माह तक रख देना चाहिए। 6 माह के पश्चात् इसको निकाल कर सेवन के लिए रोगियों को दें। इसकी मात्रा 6 ग्राम की होती है। 6 ग्राम माजून की 1-1 मात्रा दिन में 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। दूध पीने की सलाह भी दें। गाय का दूध श्रेष्ठ फल देता है।

6. योग- अदरक का रस 6 ग्राम, घी 3 ग्राम, शहद 5 ग्राम, सफेद प्याज का रस 8 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त चारों औषधियों को मिलाकर एक जान करें। यह परीक्षित नुस्खा है। इसका प्रभाव तीव्र गति से होता है। यह नामर्दी को नष्ट कर बलवीर्य कांति को बढ़ाने वाला अनोखा योग है। नामर्दी से ग्रस्त रोगियों के लिए यह रामबाण असर दिखाने वाला गुणकारी योग है। इसे 2 माह तक सेवन करने का निर्देश दें। उपर्युक्त औषधियां को एक मात्रा के रूप में सेवन कराया जाता है। प्रातःकाल सभी को मिलाकर चाटने का निर्देश देना हितकर होता है।

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7. योग- तालमखाना, बड़ी खरेटी, कौंच के बीज की गिरी, शतावर, गोखरू तथा गंगरेन प्रत्येक 125 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियां एकत्र करें और घोंट पीसकर एक जान चूर्ण बनाने के बाद छान लें। यह चूर्ण अति लाभदायक तथा मैथुन रोगियों के लिए रामबाण अचूक सिद्ध होता है। इसक प्रभाव निष्फल नहीं जाता। इसको सेवन कराने से अक्षम रोगी बलवीर्य कांतिवान बन जाता है। इसके सेवन से रोगी कई स्त्रियों के साथ मैथुन करने में सफल हो जाता है। 6 ग्राम चूर्ण सेवन करने के उपरान्त गर्म दूध पीने का निर्देश दें। अति तीव्र नामर्दी, शीघ्रपतन तथा वीर्य विकार से रोगी पीड़ित हो तो 12 ग्राम चूर्ण दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें। इस चूर्ण को 60 दिन अर्थात् 2 माह तक सेवन करने की सलाह दें।

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