Namardi Ka Ilaj

Namardi Ka Ilaj

नामर्दी का इलाज

नपुंसकता, नामर्दी, मर्दाना कमजोरी
(Impotency)

परिभाषा-

Impotence Synonym, Impotence Treatment, Erectile Dysfunction

नपुंसकता, पुरूष की उस सेक्स कमजोरी को कहते हैं, जिसमें संभोग के दौरान पुरूष के लिंग में तनाव नहीं आ पाता है और यदि आ भी जाये, तो यौन प्रवेश से पूर्व ही लिंग का तनाव शिथिल पड़ जाता है और लिंग पूर्वावस्था में आ जाता है। नपुंसकता व नामर्दी एक ही रोग के दो अलग-अलग उच्चारण हैं। नामर्दी के कारण पुरूष, स्त्री के लायक नहीं रहता है। वह स्त्री के सम्पर्क में जाने से कतराने व घबराने लगता है। नपुंसकता को अगर दो रूपो में समझा जाये तो पहली होती है शारीरिक नपुंसकता, जिसमें पुरूष अंदरूनी रूप में सेक्स विकार से ग्रस्त होता है। यानी बचपन की गलतियां, बुरी संगत व आदतों के कारण आई नपुंसकता। इसका उपचार बुरी आदतों में सुधार, दिनचर्या में सुधार व उचित आयुर्वेदिक पद्धति द्वारा किया जा सकता है।

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और दूसरी नपुंसकता होती है मानसिक। इस अवस्था में पुरूष के अंदर कोई सेक्स कमी या विकार नहीं होता है। केवल किसी तनाव, गहरा दुःख या फिर घबराहट के कारण कभी-कभी लिंग में तनाव नहीं आ पाता है और व्यक्ति स्वयं ही खुद के प्रति यह धारणा बना लेता है कि वह नामर्दी का शिकार हो गया है और स्त्री के लायक नहीं रहा। इसका उपचार धैर्य, संतुलित आहार व नियमित दिनचर्या में सुधार करके किया जा सकता है। इसके अलावा व्यक्ति को खुद भी स्वयं पर विश्वास रखने की जरूरत है और पुरूष कीे महिला पार्टनर को भी चाहिए कि वह पुरूष साथी का विश्वास दिलाये कि वह पूर्ण मर्द है और उसे उसके साथ मैथुन में पूर्ण आनंद प्राप्त हो रहा है। ऐसा करने से पुरूष में स्वयं ही अंदर से उत्साह जागेगा और वह थोड़े से प्रयास से ही पूर्ण उत्तेजित होकर संभोग में सफलता प्राप्त कर लेगा।

इन सबके अलावा एक तीसरी नपुंसकता भी होती है जन्मजात नपुंसकता। इस श्रेणी को हमारे समाज में हिजरा व किन्नर कहकर संबोधित किया जाता है और इस प्रकार की अनुवांशिक नपुंसकता का कोई भी इलाज नहीं है। यह असाध्य है।

लेकिन इस हिंदी लेख में हम बात करेंगे पहली नपुंसकता यानी अंदरूनी शारीरिक विकार से उत्पन्न नपुंसकता की, जिसका उपचार आयुर्वेद में छिपा है और संभव है।

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नामर्दी दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार-

Namardi Ka Ilaj

1. प्याज के आधा किलो रस में एक पाव मधु मिलाकर पकाएं। जब प्याज का पानी जल जाये, केवल मधु रह जाये, तब आग से उतार कर उसमें सफेद मूसली पीसकर आधा पाव मिलायें। 10-10 ग्राम सुबह-शाम खिलायें। इससे नपुंसक भी 40 दिन में कई-कई स्त्रियों से संभोग कर सकता है। मर्दाना कमजोरी और हस्तमैथुन से उत्पन्न विकारों में विशेष गुणकारी है।

2. अदरक का रस एक पाव, प्याज का रस एक पाव, मुर्गी के दस अंडों की जर्दी, बिनौले का तेल आधा पाव, मधु डेढ़ पाव। मधु में अण्डों की जर्दी मिलाकर जोर से रगड़ें। मिल जाने पर तेल मिलाकर फेंटे। तब अदरक और प्याज का रस मिलाकर भली प्रकार फेंट कर धीमी आग पर पकायें। गाढ़ा हो जाने पर उतार कर रख लें। 25 से 50 ग्राम तक शक्ति के अनुसार गाय के दूध से खिलायें। मर्दाना ताकत पैदा करने की बहुत प्रभावशाली औषधि है। हस्तमैथुन से विकृत व्यक्तियों और बूढ़ों के लिए अत्यंत लाभप्रद है।

3. असगंध नागौरी पीसकर 9 ग्राम लेकर आधा किलो गाय के दूध में उबालें। जब डेढ़ पाव दूध रह जाये तो चीनी मिलाकर पिलायें। 40 दिन तक इस प्रकार असगंध मिला दूध पिलाने से बहुत मर्दाना स्तम्भन शक्ति उत्पन्न होती है।

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4. चैकिया सुहागा, काफूर 2 ग्राम, लौंग 12 दानें, काली मिर्च 16 दानें। सबको पीसकर पानी में घोंटकर जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। संभोग से पहले एक गोली पानी में घिसकर पुरूषेन्द्रिय पर लेप करें। जब तक इन्द्री नहीं धोयेंगे, तब तक लिंग तना रहेगा।

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5. मालकंगनी एक पाव को सवा किलो गाय के दूध में धीमी आग पर पकायें। दूध जलने न पाये। खोया बन जाने पर पीस लें। तब एक पाव गाय का घी डालकर भूनें। इसमें 200 ग्राम मधु मिलाकर घोंट कर रख लें। 3 से 6 ग्राम तक प्रातः समय दूध से खिलायें। मर्दाना ताकत उत्पन्न करती और स्नायु शक्ति वर्धक है।

6. मूसली सफेद एक पाव, कूट-पीसकर पाउडर बना लें। तब 2 किलो गाय के दूध में मिला और पका कर खोया बनायें। तब एक पाव गाय के घी में भूनें और एक किलो खांड की चाशनी मिलाकर हलवा बना लें। 20-20 ग्राम सुबह-शाम रोगी को खिलायें। यह योग वीर्य गाढ़ा करता है और मर्दाना कमजोरी को दूर करता है।

7. शक्तिदायक हलवा- सौ ग्राम शतावर महीन पीस लें। 5-10 ग्राम लेकर रात को आधा किलो दूध में उबालें तथा चीनी 50 ग्राम मिलाकर ठंडा होने दें। इसके बाद खा लिया करें। शक्तिदायक है, तुरन्त लाभ होता है।

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